Bal Gangadhar Tilak In Hindi Essay Book

बाल गंगाधर तिलक (Bal Gangadhar Tilak) भारत के स्‍वतंत्रता सेनानी (freedom fighter) और समाज सुधारक (social reformer) थे इन्‍हें लोकमान्‍य तिलक (Lokmanya Tilak) के नाम भी जाना जाता था लोकमान्‍य तिलक जी ने अपने जीवन की आखिरी सांस 1 अगस्त सन् 1920 को ली थी इस दिन को उनके स्‍मृति दिन के रूप में मनाया जाता है तो आइये जानते हैंं लोकमान्‍य तिलक केे जीवन परिचय केे बारे में –

Bal Gangadhar Tilak Biography in Hindi – बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय

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बाल गंगाधर तिलक के अनमोल विचार

  1. बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र में स्थित रत्नागिरी जिले के एक गाँव चिखली में हुआ था
  2. इनका पूरा नाम लोकमान्‍य श्री बाल गंगाधर तिलक (Lokmanya Bal Gangadhar Tilak) था
  3. बाल गंगाधर तिलक ने मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ था
  4. इनके पिता का नाम ‘श्री गंगाधर रामचंद्र तिलक'(Shri Gangadhar Ramchandra Tilak) था
  5. बाल गंगाधर तिलक ने “मराठा दर्पण” और “केसरी” नाम के दो समाचार पत्र शरू कियेे थे
  6. केसरी समाचार पत्र के छपने वाले उनके लेखों की वजह से उन्हें कई बार जेल भेजा गया था
  7. बाल गंगाधर तिलक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में भी शमिल हुऐ थे
  8. लेकिन बाद में उन्‍होेंंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को छोड दिया था
  9. और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दो भागों में विभाजित हो गया एक “गरम दल” और दूसरा “नरम दल”
  10. गरम दल में तिलक के साथ लाला लाजपत राय और बिपिन चन्द्र पाल शामिल हुऐ थे
  11. इन दोंनों के गरम दल में शामिल होते ही इन तीनों को लाल-बाल-पाल के नाम से जाना जाने लगा
  12. इन्होंने सबसे पहले ब्रिटिश राज के दौरान पूर्ण स्वराज की माँग उठायी थी
  13. बाल गंगाधर तिलक की मृृत्‍यु 1 अगस्त सन् 1920 ई. को बंबई में हो गई
  14. इनकी मृृत्‍यु पर राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी (Mahatma Gandhi) आधुनिक भारत का निर्माता कहा
  15. देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू (Jawahar Lal Nehru) जी उन्‍हें भारतीय क्रांति के जनक की उपाधि दी थी
  16. इनका दिया हुआ नारा “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा” बहुत प्रसिद्ध हुआ था

Books written by Bal Gangadhar Tilak – बाल गंगाधर तिलक द्वारा लिखी पुस्‍तकें

  • श्रीमद्भागवतगीता रहस्य अथवा कर्मयोग शास्त्र
  • वेद काल का निर्णय
  • आर्यों का मूल निवास स्थान
  • वेदों का काल-निर्णय और वेदांग ज्योतिष
  • हिन्दुत्व
  • श्यामजीकृष्ण वर्मा को लिखे तिलक के पत्र

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बाल गंगाधर तिलक अंग्रेजों से भारत को आजाद करने के लिए लड़ने वाले पहले नेताओं में से एक थे। वे एक शिक्षक, वकील, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे। बाल गंगाधर तिलक का जन्म महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के चिखली गाँव में हुआ था और उनकी शिक्षा भी महाराष्ट्र में ही हुई थी। वह पढ़ने में काफी कुशाग्र थे और उन्होंने वकालत की डिग्री भी हासिल कर ली। इन्हें लोकमान्य तिलक के नाम से भी जाना जाता था।

कांग्रेस की स्थापना के कुछ समय बाद ही बाल गंगाधर तिलक कांग्रेस से जुड़ गए और वहां से उन्होंने भारत को आजादी दिलाने के लिए संघर्ष करने लगे। उस समय बहुत ही कम लोग अंग्रेजों से लोहा लेने की हिम्मत दिखाते थे। लेकिन बाल गंगाधर तिलक काफी बहादुरी से भारत के लोगों की दुर्दशा को दूर करने के लिए अंग्रेजों की गुलामी के खिलाफ आवाज उठाने लगे।

बाल गंगाधर तिलक ने समाचार पत्र भी निकाला, जिसका नाम “मराठा दर्पण” और “केसरी” था और वह समाचार पत्र के माध्यम से लोगों को अंग्रेजों की राज की खामियां बताने लगे और वे लोगों को यह समझाने में सफल रहे कि कैसे अंग्रेजो के खिलाफ लड़ा जाए और आजादी लिया जाए।

बाल गंगाधर तिलक ने “स्वराज हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है ” का नारा दिया था। बाल गंगाधर तिलक से अंग्रेज भी डरने लगे थे और उन्हें छोटे-मोटे कारण दिखाकर जेल में बंद कर दिया और उन्हें काफी लंबे समय के लिए बर्मा की जेल में भेज दिया।

बाल गंगाधर तिलक ने हिंदुओं की ताकत बढ़ाने के लिए सार्वजनिक गणेश पूजा और विसर्जन की परंपरा की शुरुआत की। इसका मुख्य मकसद यह था कि लोगों में आपस में एकता बढ़े और अंग्रेजों से लड़ने में ताकत मिले। बाल गंगाधर तिलक भारत को आजादी दिलाने के लिए जीवन भर लड़ते रहे और 1 अगस्त 1920 ई. को मुम्बई में उनकी अचानक मृत्यु हो गई।

बाल गंगाधर तिलक से सारे नेताओं को काफी प्रेरणा मिली और वह देश की आजादी के लिए लड़ाई में कूद पड़े और अंत तक देश को अंग्रेजों से आजाद करके रहे। इस तरह से भारत की आजादी में बाल गंगाधर तिलक का अत्यंत योगदान है। वह भारत के एक महान नेता थे।

(word count: 350)

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